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पाक – क्या आर्मी चीफ़ बाजवा को आज हटना होगा?

पाकिस्तान में आर्मी प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को अप्रत्याशित माना जा रहा है. इसे प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के लिए झटके तौर पर भी देखा जा रहा है. ऐसा माना जाता है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और जनरल क़मर जावेद बाजवा में बहुत अच्छे संबंध हैं और अगर सुप्रीम कोर्ट बाजवा को हटाने का निर्देश देता है तो यह उनके लिए परेशान करने वाला होगा. जनरल बाजवा का कार्यकाल इसी महीने 29 नवंबर को ख़त्म हो रहा है. इसी मामले में मंगलवार को पाकिस्तान के क़ानून मंत्री फ़रोग़ नसीम ने इस्तीफ़ा दे दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने जनरल बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने के आदेश को निलंबित किया तो कैबिेनेट की आपातकालीन बैठक हुई और इसी में फ़ैसला किया गया कि क़ानून मंत्री इस्तीफ़ा देंगे. अमित शाह : सरकार बनाने के लिए क्यों किया अजित पवार पर भरोसा?

कहा जा रहा है कि क़ानून मंत्री ने स्वेच्छा से इस्तीफ़ा दिया है. लेकिन ये बात भी सामने आई है कि जनरल बाजवा के कार्यकाल बढ़ाए जाने का आवेदन उन्होंने राष्ट्रपति को नहीं भेजा था.

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद अहमद ने क़ानून मंत्री के इस्तीफ़े पर कहा, ”क़ानून मंत्री ने स्वेच्छा से इस्तीफ़ा दिया है. अब वो सुप्रीम कोर्ट में आर्मी प्रमुख के कार्यकाल बढ़ाने के केस में सरकार की तरफ़ से दलील देंगे. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने फ़रोग़ नसीम के इस्तीफ़े को स्वीकार कर लिया है.”

पाकिस्तान

पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल जियो न्यूज़ का कहना है कि पीएम ख़ान ने आर्मी प्रमुख के कार्यकाल बढ़ाए जाने के मामले में नसीम की लापरवाही से नाराज़गी जताई है. हालांकि राशिद ने इन रिपोर्टों को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि पीएम ख़ान ने नसीम की तारीफ़ की है. उन्होंने कहा कि आपातकालीन बैठक में पीएम ख़ान ने आर्मी प्रमुख क़मर जावेद बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने को भी सही ठहराया है. पाकिस्तान बनने के बाद से सेना की मुल्क में अहम भूमिका रही है. यहां की सरकार में सेना की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका हमेशा से रही है. इमरान ख़ान ने ज़नरल क़मर जावेद बाजवा के कार्यकाल बढ़ाए जाने के समर्थन में कहा था कि सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए उनका रहना ज़रूरी है. कांग्रेस ने रख दी बड़ी मांग

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जनरल बाजवा के कार्यकाल बढ़ाए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज भी यानी 27 नवंबर को भी होगी. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश आसिफ़ सईद खोसा के साथ दो जजों ने अस्थायी रूप से कार्यकाल बढ़ाने के आदेश को निलंबित कर दिया था. इसके साथ ही अदालत ने जनरल बाजवा को कार्यकाल बढ़ाए जाने के मामले में हुई असंगति को लेकर समन भेजा है.

इमरान ख़ान

कहा जा रहा है कि इस मामले में इमरान ख़ान की सरकार बैकफुट पर है. सरकार के अधिकारियों का कहना है कि वो इसमें हुई ग़लती को सुधार रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला एक स्थानीय वकील हनीफ़ राही के ज़रिए पहुंचा था. क़ानून मंत्री फ़रोग़ नसीम को ही जनरल बाजवा के कार्यकाल बढ़ाए जाने का आवेदन देखना था. हालांकि सरकार फ़रोग़ का बचाव कर रही है और वही सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सरकार का पक्ष रखेंगे.सत्ता में आने से पहले इमरान ख़ान सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाए जाने के पक्षधर नहीं थे. उन्होंने कहा था कि किसी भी सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाना सेना के नियमों को बदलने का काम है जो एक संस्था के रूप में सेना को कमज़ोर करता है.इमरान का यह बयान 2010 में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सरकार में सेना प्रमुख रहे असफाक़ परवेज़ कयानी के कार्यकाल को बढ़ाए जाने के बाद आया था. अजित पवार ने दिया इस्तीफा, जानिए सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

उस समय एक टेलीविज़न इंटरव्यू में इमरान ने कहा था, “ऐतिहासिक रूप से चाहे युद्ध ही क्यों न चल रहा हो पश्चिम के देश अपने सेना प्रमुख का कार्यकाल नहीं बढ़ाते. संस्थाएं अपने नियम क़ायदे का अनुसरण करती हैं और जब एक व्यक्ति के लिए इसमें बदलाव किया जाता है तो संस्थाएं नष्ट हो जाती हैं, जैसा कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने किया और सभी तानाशाह करते रहे हैं.”

इसके उलट जनरल राहील शरीफ़ ने आश्चर्यजनक रूप से रिटायर होने से 10 महीने पहले यह घोषणा कर दी थी कि वो कार्यकाल बढ़ाए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे. हालांकि उन्हें ऐसा ऑफर तक नहीं किया गया था. इस पर इमरान ने 25 जनवरी 2016 को ट्वीट किया कि “कार्यकाल के विस्तार को स्वीकार नहीं करने की घोषणा से जनरल राहील शरीफ़ का कद बढ़ा है.”

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