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अमित शाह : सरकार बनाने के लिए क्यों किया अजित पवार पर भरोसा?

महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस ने गठबंधन कर सरकार बनाने की तैयारी कर ली है। लेकिन इस पूरे ऐपिसोड में सबसे ज्यादा किरकिरी किसी दल की हुई है तो वह है बीजेपी। बीजेपी ने आखिर किस बूते एनसीपी नेता अजित पवार पर भरोसा किया और सरकार बनाई? बीजेपी के नेता इस सवाल का जवाब बेहद घुमाकर दे रहे हैं। जहां एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ‘सही समय पर सही बात’ करने की बात कहकर इस सवाल से कन्नी काट ली, वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी घुमा-फिराकर इस सवाल का जवाब दिया।

एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, ‘अजित पवार को विधायक दल का नेता चुना। उन्हें सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया। राज्यपाल ने भी सरकार बनाने को लेकर उनसे ही बात की। एनसीपी ने जब पहली बार सरकार बनाने में असमर्थता जताई तो उस पत्र पर भी अजित पवार के ही हस्ताक्षर थे। अब हमारे पास जो समर्थन पत्र आया, उस पर भी अजित पवार के ही हस्ताक्षर थे।’ इस दौरान अजित पवार से जुड़े केस वापस लिए जाने के सवाल पर शाह ने कहा कि उनसे जुड़ा कोई केस वापस नहीं लिया गया है।

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सीएम पद पर नहीं दिया कोई आश्वासन

इस दौरान अमित शाह ने बताया, ‘हम चुनाव में गए। हमारा शिवसेना का गठबंधन हुआ। दोनों पार्टियों को एक-दूसरे के वोट मिले। हमारे गठबंधन को बहुमत मिला। यह जनादेश सिटिंग सीएम देवेंद्र जी को मिला। कई रैलियों में हमने कहा था कि सीएम देवेंद्र जी होंगे। किसी ने कोई विरोध नहीं किया। मैं साफ करना चाहता हूं कि पहले ढाई साल छोड़ दें, सीएम पद को लेकर भी कोई आश्वासन नहीं दिया गया था। हर रैली में हमने देवेंद्र फडणवीस को सीएम कहा है। इनमें कई रैलियों में शिवसेना नेता मंच पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। शिवसेना का कोई भी एमएलए ऐसा नहीं है, जिसने नरेंद्र मोदी जी का पोस्टर लगाकर वोट नहीं मांगे हैं। आदित्य ठाकरे ने भी लगाए थे।’

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शिवसेना ने तोड़ा जनादेश

अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले जनादेश तोड़ने का काम शिवसेना ने किया। विचारधारा और चुनावपूर्व गठबंधन के खिलाफ गए। विचारधारा को ताक पर रखा। हम पर होर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का आरोप लगाया जा रहा है। हमने तो किसी विधायक को होटल में नहीं रखा। जोड़ तोड़कर सरकार बनाना और इसे बीजेपी की हार बताना गलत है। जनता यह बात समझती है। शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की विचारधारा का जोड़ क्या है? वे हम पर होर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उन्होंने तो सीएम पद देकर उन्होंने पूरा अस्तबल ही खरीद लिया। क्या पद का लालच खरीद-फरोख्त नहीं है।’

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शिवसेना ने किया विचारधारा से समझौता

बीजेपी अध्यक्ष ने अपनी सहयोगी रही शिवसेना पर विचारधारा से समझौता करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘तमाम मुद्दों पर हमारा स्टैंड साफ है। जबकि शिवसेना प्रमुख चुनाव के बाद 23 तारीख को अयोध्या में दर्शन करने जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने सीएम बनने के लिए अपना प्लान ड्रॉप कर दिया।’

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